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राहुल गांधी के पीएम मोदी के साथ सार्वजनिक बहस में रुख को लेकर भाजपा नाराज

भाजपा ने राहुल गांधी के पीएम मोदी के साथ सार्वजनिक बहस में रुख को लेकर नाराज़

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस के नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सार्वजनिक बहस में हिस्सा लेने की पेशकश को लेकर अपना विरोध जताया है। इस प्रस्ताव को भाजपा ने ‘राजनीतिक दालाली’ के रूप में अस्वीकार किया है। भाजपा के नेता और मुख्य प्रवक्ता श्रीमती निर्मला सीतारमण ने इसे ‘राजनीतिक दालाली’ के रूप में बताया है और कहा है कि यह केवल राजनीतिक फोकस पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास है।

भाजपा ने कहा कि राहुल गांधी की पेशकश में किसी प्रकार की बहस का निमंत्रण नहीं है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। भाजपा ने इसे केवल राजनीतिक दालाली का एक दिखावा माना है और राहुल गांधी को उसके नेतृत्व की कमजोरी को ढकने के लिए इसे किया गया है।

राहुल गांधी ने हाल ही में सामाजिक मीडिया पर एक वीडियो के माध्यम से एक अपील की थी, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को सार्वजनिक बहस के लिए निमंत्रण दिया था। उन्होंने कहा था कि बहस के माध्यम से जनता को समझाया जा सकता है कि किस राजनीतिक दल ने देश के हित में काम किया है।

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर भाजपा के विरोध को ताना मारते हुए कहा कि यह सिर्फ और सिर्फ उनके भय का प्रतीक है। कांग्रेस नेता और प्रेस कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी के बारे में बोलते हुए श्रीमती सोनिया गांधी ने कहा, “भाजपा को प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व से डर लग रहा है, इसलिए वह बहस से बच रहे हैं।”

भाजपा के बयानों के बावजूद, राहुल गांधी ने अपना प्रस्ताव स्थायी रूप से व्यक्त किया है और उन्होंने बहस को लेकर तैयारी करने का संकेत दिया है। इस मुद्दे पर विपक्ष और सत्ताधारी दोनों ही दलों के बीच सरकारी कामकाज की दिशा में बहस की बातें हो रही हैं।

इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी ने राहुल गांधी को कई बार बहस के लिए निमंत्रण दिया था, लेकिन राहुल गांधी ने उसे स्वीकार नहीं किया था। लेकिन इस बार राहुल गांधी ने इस निमंत्रण को स्वीकार किया है और अब देश को उन दोनों के बीच की बहस का स्वाद चखाने का वक्त है।

समाज में इस बहस को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग इसे देश की जनता के हित में एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे सिर्फ राजनीतिक खेल का हिस्सा समझ रहे हैं।

सार्वजनिक बहस के माध्यम से जनता को राजनीतिक दलों की नीतियों और कामकाज के प्रति जागरूक करने की उम्मीदें हैं। यह बहस दोनों दलों के नेताओं के बीच नए दावे और मुकाबले का संजीवनी बोतल हो सकती है।

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